कंगना रनौत के संसदीय क्षेत्र कि एक विधानसभा क्षेत्र में नहीं मिले सांसद नीति के तहत फंड
हिमाचल क्राइम न्यूज़
कुल्लू। निस
केंद्र सरकार की ओर से भी सांसद निधि के माध्यम से विकास कार्यों में अहम भूमिका निभाई जाती है. ऐसे में प्रत्येक सांसद को अपने कार्यकाल में 5 करोड रुपए सांसद निधि के रूप में दिए जाते हैं और जिला प्रशासन के माध्यम से उस धनराशि को विकास कार्यों में खर्च किया जाता है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला की बात करें तो यह जिला मंडी संसदीय क्षेत्र के तहत आता है और यहां की सांसद कंगना रनौत हैं.
साल 2024-25 के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सांसद निधि के माध्यम से विकास के लिए मिलने वाले धन को लेकर जिला कुल्लू की आनी विधानसभा क्षेत्र के हाथ खाली रह गए हैं. सांसद निधि के तहत वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कुल्लू जिला को 62.73 लाख रुपए मिला है, लेकिन अगर विधानसभा क्षेत्र के आधार पर आवंटन की बात की जाए तो जिला के चार विधानसभा क्षेत्रों में से आनी विधानसभा क्षेत्र ऐसा है, जहां वर्ष भर में एक भी योजना के लिए धन नहीं मिला है.
मनाली को मिला सबसे ज्यादा पैसा
आनी विधानसभा के अलावा जिला कुल्लू के बंजार, कुल्लू और मनाली विस क्षेत्र की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा मनाली विधानसभा क्षेत्र को 35 लाख 73 हजार रुपए मिले हैं, जिसमें 6 योजनाओं पर कार्य चला है, जबकि दूसरे नम्बर पर कुल्लू विधानसभा क्षेत्र है, जहां 24 लाख रुपए का बजट दिया गया है और इससे 2 योजनाओं पर कार्य चल रहा है, जबकि बंजार विधानसभा क्षेत्र में एक मात्र योजना के लिए 3 लाख रुपए का बजट दिया गया है.
आरटीआई कार्यकर्ता ने मांगी थी जानकारी
जिला मुख्यालय कुल्लू के अखाड़ा बाजार के राज कुमार जैन का कहना है कि 'सांसद निधि के तहत मिलने वाले धन की जानकारी के लिए आरटीआई लगाई थी, लेकिन सिर्फ 4 विधानसभा क्षेत्र की ही जानकारी मिल पाई है. उपायुक्त कार्यालय की ओर से मिली जानकारी में खुलासा हुआ है कि इन चार विस क्षेत्र में आनी विस को कोई भी पैसा नहीं मिला है, जबकि मनाली में सबसे ज्यादा धन दिया गया. सांसद निधि योजना के तहत एक साल में मनाली विधानसभा के शलीन में खेल मैदान, बशिष्ठ में सरस्वती नाला सड़क, कलबर्ट निर्माण, मनाली में सुरक्षा दीवार, नसोगी सामुदायिक भवन, कुल्लू विधानसभा में किन्नौरी सभा भवन, डुंखरी गाहर में दीवार, चनसारी में सुरक्षा दीवार लगाने के साथ साथ बंजार विधानसभा के मशंगा में महिला मंडल भवन निर्माण के लिए धन उपलब्ध करवाया गया है.'
कुल्लू में 62 लाख से अधिक कार्यों को दी स्वीकृति
डीसी कुल्लू तोरुल एस रवीश ने बताया कि 'एक साल में जिला कुल्लू की तीन विधानसभा क्षेत्र में 62 लाख 73 हजार रुपए की राशि विकास कार्यों के लिए सांसद निधि से स्वीकृत की गई है. सांसद निधि के माध्यम से विभिन्न विकास कार्यों को पूरा किया जा रहा हैं. सांसद ने जो भी प्रस्ताव विकास कार्यों के लिए दिए हैं, उनके लिए प्रशासन के माध्यम से ही धन राशि वितरित की जाती हैं.'
1993 में हुई थी सांसद निधि की शुरुआत
सांसदों को दी जाने वाली सांसद निधि योजना की शुरुआत पहली बार साल 1993 में हुई थी. उस दौरान देश में स्वर्गीय प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की सरकार थी. उस वक्त सांसदों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए एक करोड़ रुपये सालाना जारी किए जाते थे. कुछ साल बाद इस फंड को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये और फिर 2011-12 में पूर्व प्रधानमंत्री स्व मनमोहन सिंह की सरकार में पांच करोड़ रुपये कर दिया गया. वही, साल 2022 में इस राशि को पांच साल के लिए 25 करोड़ रुपए कर दिया गया.
हर साल 5 करोड़ रुपये कर सकते हैं खर्च
मंडी संसदीय क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी रहे सेवानिवृत ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने बताया कि 'भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के मुताबिक इस योजना का मुख्य उद्देश्य संसद सदस्यों को उनके निर्वाचन क्षेत्र में विकास से जुड़े कार्यों की सिफारिश करने में सक्षम बनाना है. सांसद इस पैसे से अपने क्षेत्र मे पीने के पानी, शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ सड़कों के निर्माण की सिफारिश कर सकते हैं. इस योजना के उद्देश्य और दिशानिर्देशों से स्पष्ट है कि सांसद अपने क्षेत्र के विकास से जुड़े कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं. सरकार के स्तर पर उनकी सिफारिश स्वीकार की जाती है और सरकार का प्रशासनिक अमला उसे क्रियान्वित करता है. इस योजना के तहत सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों में हर साल पांच करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं.'
ऐसे खर्च होती है सांसदन निधि
सांसद निधि को लोकसभा सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में कहीं भी और राज्यसभा सांसद अपने राज्य में कहीं भी और मनोनीत सांसद पूरे देश में विकास कार्यों के लिए कहीं भी आवंटित कर सकता है. वहीं, नोडल जिले के रूप में जिले का चयन करते समय सांसद को जिले के बारे में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के साथ-साथ राज्य सरकार और जिला मजिस्ट्रेट को भी सूचित करना होता हैं.
एक लाख से कम नहीं होनी चाहिए स्वीकृत राशि
अगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र एक से अधिक जिलों में फैला हुआ है, तो सांसद को किसी एक जिले को नोडल जिले के रूप में चुनना होता है. वही, सांसद निधि के तहत किसी भी योजना के लिए स्वीकृत राशि एक लाख रुपये से कम नहीं होनी चाहिए. हालांकि, अगर जिला के प्रमुख अधिकारी को लगता है कि काम पूरा करने के लिए कम राशि की जरूरत है और अगर यह जनता के लिए फायदेमंद है, तो एक लाख से कम राशि होने पर भी राशि स्वीकृत की जाती है.
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