HRTC कि कार्यशैली सवालिया निशान पर लगाते हुए हाइकोर्ट हुआ सख्त
हिमाचल क्राइम न्यूज़
शिमला। ब्यूरो
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हिमाचल पथ परिवहन निगम की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए 9 कर्मियों को 8 साल की अस्थाई सेवा अवधि पूरी करने के बाद रेगुलर करने के आदेश पारित कर दिए.
एक साथ नौ याचिकाओं का निपटारा करते हुए न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने अपने निर्णय में साफ तौर पर कहा कि अपने नागरिकों के अधिकारों के संरक्षक का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद, राज्य या उसके उपक्रम अपने दायित्वों से बचने के लिए सार्वजनिक रोजगार के क्षेत्र में शोषणकारी तरीका अपनाते हैं, प्रारंभिक नियुक्तियां अस्थायी आधार पर, यानी अनुबंध, तदर्थ, कार्यकाल, दैनिक वेतन आदि पर करके नियोजित व्यक्तियों को उनके उचित दावों और लाभों से वंचित करते हैं, ताकि अपनी जिम्मेदारी से बच सकें और भविष्य में इस संबंध में नीतियों को अधिसूचित न करके कार्यभारित दर्जा प्रदान करने या राज्य की नियमितीकरण नीति के लाभों के विस्तार में देरी कर सकें. वर्तमान मामला भी ऐसी ही प्रथा का एक उदाहरण है.
कोर्ट ने इन मामलों में एचआरटीसी द्वारा याचिकाकर्ताओं को आठ वर्ष की सेवा के बाद नियमितीकरण का लाभ देने से इंकार करने के लिए दिए गए कारणों को अयोग्य पाते हुए कहा कि अपनी प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से आठ वर्ष की सेवा के बाद नियमितीकरण के हकदार हैं. याचिकाकर्ताओं के दावे को खारिज करने के लिए दिए गए कारण उच्चतम स्तर की तर्कहीनता के दुर्लभतम मामलों का एक ज्वलंत उदाहरण हैं. याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति की पहली तिथि एचआरटीसी को अच्छी तरह से ज्ञात है और उनके ओर से प्रस्तुत याचिकाओं में भी इसका उल्लेख किया गया है और एचआरटीसी के दायर जवाबों में भी यही कहा गया है.
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