DGP व SP के बीच तनाव में सीएम सुक्खू ने अधिकारियों को दी अनुशासन में रहने की नसीहत
हिमाचल क्राइम न्यूज़
शिमला। ब्यूरो
दिल्ली दौरे से शिमला लौटे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों के बीच मचे घमासान को लेकर अपनी नाराजगी भी जताई है. उन्होंने अधिकारियों को अनुशासन में रहने की भी नसीहत दी. साथ ही विमल नेगी मौत मामले में सीबीआई जांच के आदेश पर उन्होंने कहा कि सरकार इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील नहीं करेगी.
शिमला एसपी संजीव गांधी द्वारा डीजीपी और मुख्य सचिव पर लगाए गए आरोपों और अधिकारियों के बीच मचे घमासान पर नाराजगी जताई है. सीएम ने अधिकारियों को अनुशासन में रहने की भी नसीहत दी.
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, "हिमाचल प्रदेश में मेरी अनुपस्थिति में जो कुछ घटनाक्रम अधिकारियों के बीच घटा है, उसको लेकर जल्द ही वे उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी. इसको लेकर अधिकारियों से फीडबैक भी लिया जा रहा है. जिसमें कानून के सभी पहलुओं को देखकर आगामी कार्रवाई की जाएगी".
बता दें कि हिमाचल में विमल नेगी की मौत मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद न केवल अधिकारियों के बीच घमासान मचा है, बल्कि भाजपा की ओर से इस मामले पर सरकार को घेरे जाने से गर्मियों के मौसम में सियासी पारा भी काफी अधिक चढ़ गया है. वहीं, प्रदेश में पैदा हुए इस तरह के हालातों के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के बाद शिमला पहुंच गए है. जिसके बाद सीएम सुक्खू ने शिमला में विमल नेगी मौत मामले को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की.
सीएम सुक्खू ने कहा कि हाईकोर्ट ने विमल नेगी की मौत मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के जो आदेश पारित किए हैं, इस फैसले के खिलाफ सरकार अपील नहीं करेगी. हालांकि, मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने हिमाचल पावर कार्पोरेशन लिमिटेड के चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत मामले में जस्टिस अजय मोहन गोयल की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने सीबीआई की जांच में हिमाचल कैडर का कोई ऑफिसर नहीं होने के की बात कही है.
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, "सरकार निष्पक्षता से मामले की हर पहलू को लेकर जांच कर रही थी, लेकिन विमल नेगी का परिवार उनसे कहते तो वह खुद ही इस केस की जांच सीबीआई को दे देते".
ACS ओंकार की रिपोर्ट पर कहा ये
सीएम सुक्खू ने विमल नेगी मौत मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) ओंकार शर्मा की रिपोर्ट पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक अतुल वर्मा और शिमला पुलिस की एसआईटी की रिपोर्ट अलग-अलग थी. वहीं उन्होंने जब ACS की रिपोर्ट पढ़ी तो उस रिपोर्ट में जिन पर आरोप लगाए गए थे. जब ओंकार से पूछा गया कि जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं, इसकी फैक्ट फाइंडिंग होनी चाहिए थी. इसलिए जिन पर आरोप लगें है, उनकी तरफ से भी सफाई आनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि हम न्याय की गद्दी पर बैठे हैं, इसलिए ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक को न्याय मिले और दूसरे को नहीं. उन्होंने कहा कि ACS की रिपोर्ट लॉ की ओपिनियन ली जा रही थी.
भाजपा को केवल राजनीति करनी है
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा को विमल नेगी की मौत से कुछ लेना देना नहीं है. उन्हें तो केवल इस पर राजनीति करनी है. जो भी सरकार गिराने का षड्यंत्र कर रहे हैं, उन्हें अब जनता जवाब देगी. सीएम सुक्खू ने कहा कि पेखुबेला प्रोजेक्ट तो 15 अप्रैल 2024 को पूरा हो गया था. जबकि विमल नेगी ने 15 जून 2025 को ज्वाइन किया था. विमल नेगी एंजायटी की भी मेडिसन ले रहे थे, लेकिन उन पर क्या दबाव था, इसके लिए मैंने गहनता से जांच करने के आदेश जारी किए थे. इसी बीच विमल नेगी का परिवार कोर्ट चला गया.
भाजपा ने किया मीडिया ट्रायल
मुख्यमंत्री ने कहा कि विमल नेगी मौत मामले पर भाजपा ने मीडिया ट्रायल शुरू किया था, जिसमें विमल नेगी का परिवार भाजपा की राजनीति का शिकार हो गया. उन्होंने ने मीडिया के सामने पुलिस अधिकारियों के बीच हुई खींचतान की बात को भी स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि डीजीपी ने शपथ पत्र दायर करने से पहले मुझसे मिले थे. इस दौरान डीजीपी ने एसआईटी को बदलने को भी कहा था, लेकिन मैंने यह कहकर इनकार कर दिया था कि भाजपा इसका राजनीतिकरण करेगी.
मैंने डीजीपी से कहा था कि हम खुद सीबीआई को कैसे भेज देते हैं, इस मामले को लेकर हम किसी को छोड़ेंगे नहीं. जिसके लिए मैंने डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी को पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए कहा था. वहीं, एसपी शिमला संजीव गांधी ने DGP अतुल वर्मा पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कई गंभीर आरोप लगाए हैं. मीडिया के इस पर सीएम से पूछे गए सवाल पर सीएम सुक्खू ने कहा कि अधिकारियों को अनुशासन में रहना चाहिए.
बता दें कि एचपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चीफ इंजिनियर विमल नेगी मौत मामले को लेकर डीजीपी और एसपी शिमला के बीच तलवारें खींची हुई है. दरअसल, विमल नेगी मौत मामले में डीजीपी ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दिया था,इस शपथ पत्र में डीजीपी अतुल वर्मा ने बताया कि जब बिलासपुर गोविंद सागर झील में विमल नेगी की लाश मिली तो उनके जेब में एक पेन ड्राइव था. जब शव मिला तो वहां मछुआरे मौजूद थे और एक मछुआरे के बनाए वीडियो में ये आया कि पुलिस विभाग शिमला के सदर थाना के एएसआई पंकज शर्मा ने पेन ड्राइव को लेकर कुछ बात कर रहे हैं. शव के पास मिले सामान के रिकार्ड में पेन ड्राइव की बात छिपाई गई. डीजीपी ने शपथ पत्र में इन्हीं पहलुओं को बताया और सवाल उठाया कि पेन ड्राइव मिलने के बारे में किस-किस को पता था और उसे फॉर्मेट क्यों किया गया? वहीं, मामले में हाईकोर्ट ने विमल नेगी मौत मामले में जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए है.
वहीं, हाईकोर्ट में डीजीपी द्वारा दिए गए शपथ पत्र को लेकर शिमला एसपी संजीव गांधी ने सवाल खड़े किए और रविवार को प्रेस वार्ता में डीजीपी, मुख्य सचिव सहित कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए. एसपी शिमला ने विमल नेगी मौत मामले में एसआईटी ने जांच ईमानदारी से की है. एसपी शिमला ने विमल नेगी केस में डीजीपी ने अदालत में एक ऐसा शपथ पत्र दिया है,जिसे भ्रामक कहा जाएगा. इस तरह झूठे आरोपों के आधार पर ईमानदारी से की जा रही जांच की स्वतंत्रता को खंडित नहीं किया जा सकता. यदि डीजीपी सच्चे नहीं होते, तो अपनी बात रखने खुद हाईकोर्ट में नहीं जाते. एसपी ने कहा कि हाईकोर्ट की ऑनलाइन प्रोसिडिंग देखने के बाद उन्हें प्रतीत हुआ कि इस मामले में खुद अदालत जाकर सच्चाई रखनी चाहिए.
वहीं, आज डीजीपी हिमाचल अतुल वर्मा ने एसपी शिमला संजीव गांधी के व्यवहार को लेकर सरकार को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में कहा गया है कि एसपी ने पुलिस कंडक्ट रूल्स की अवहेलना की है. साथ ही पत्र में एसपी शिमला को पद से निलंबित करने की बात भी कही गई है.गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को ये पत्र लिखा गया था, जिसे ड्यू प्रोसेस पूरा करने के बाद आगे मुख्य सचिव को भेज दिया गया है. अब इस पर सरकार को फैसला लेना है. पत्र में सिफारिश की गई है कि कंडक्ट रूल्स की अवहेलना करने पर एसपी शिमला को तुरंत निलंबित किया जाए.
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