प्रदेश के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर रहे साइबर ठग, आखिर क्यों और कैसे?
हिमाचल क्राइम न्यूज़
शिमला। क्राइम डेस्क
देशभर में बढ़ते साइबर अपराध अब हिमाचल प्रदेश को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहे हैं. प्रदेश में न केवल लोग इस ठगी का शिकार हो रहे हैं, बल्कि अब धोखेबाज हिमाचल के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर अन्य राज्यों में भी लोगों को निशाना बना रहे हैं. साल-दर-साल डरावनी तस्वीर हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से जारी की जा रही हैं. ताजा आंकड़े साइबर अपराध के बढ़ते खतरे की ओर साफ इशारा करते हैं.
हिमाचल के नंबरों के उपयोग का ट्रेंड साइबर अपराधियों की बदलती रणनीतियों की ओर इशारा करता है, जहां वो स्थानीय पहचान का उपयोग कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं. स्थानीय नंबरों से कॉल आने पर लोग अक्सर सतर्क नहीं होते और इसी का फायदा उठाकर ठग उन्हें चूना लगाते हैं. साइबर सेल शिमला के आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 में करीब 100 मोबाइल नंबर हिमाचल के थे, जिनका उपयोग धोखाधड़ी के लिए किया गया.
हिमाचल के नंबर क्यों हैं साइबर ठगों की पसंद?
हिमाचल प्रदेश का शांत और भरोसेमंद छवि वाला सामाजिक वातावरण धोखेबाजों के लिए एक टूल बन गया है. जब किसी "हिमाचली" को हिमचाल के नंबर से कॉल आता है, तो लोग सामान्यतः सतर्क नहीं होते और ठग की बातों का विश्वास कर लेते हैं. इसके अलावा, कई बार सस्ते सिम कार्ड और फर्जी पहचान पत्रों के जरिए स्थानीय नंबर हासिल कर लिए जाते हैं.
तेजी से बढ़ते मामले
हिमाचल में बीते सालों के आंकड़े चौकाने वाले हैं और ये लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं. तेजी से बढ़ती संख्या से यह स्पष्ट है कि साइबर ठगी अब एक आम अपराध नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक संकट और संगठित अपराध बन चुका है. पूरे प्रदेश में तेजी से मामले दर्ज हो रहे हैं, लेकिन तीन जिले इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. साइबर सेल के आंकड़ों की बात करें तो 2025 में अब तक के आंकड़े बताते हैं कि शिमला, कांगड़ा और मंडी जिले साइबर ठगी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. इन जिलों में इंटरनेट की पहुंच और डिजिटल लेनदेन की बढ़ती प्रवृत्ति ने साइबर ठगों को ज्यादा अवसर दिए हैं.
साल शिकायतें
- 2023 8 हजार से अधिक
- 2024 12 हजार से अधिक 2025
- 1 जनवरी से 20 मई तक
- 76 सौ से अधिक
कैसे बचें साइबर ठगी से?
हिमाचल साइबर सेल के अनुसार, सतर्कता ही इस अपराध से बचने का एकमात्र उपाय है.
इससे बचने के लिए लोग कुछ जरूरी सुझावों का पालन कर सकते हैं जैसे:
- कभी भी OTP साझा न करें, चाहे सामने वाला खुद को बैंक अधिकारी ही क्यों न बताए.
- अज्ञात नंबरों से आई कॉल या लिंक पर भरोसा न करें.
- बैंक संबंधित जानकारी फोन, SMS या ईमेल के जरिए किसी के साथ साझा न करें.
- साइबर ठगी की किसी भी घटना की तुरंत रिपोर्ट करें.
- ईमेल आईडी में अपने कोई भी बैंक की यूजर आईडी और पासवर्ड सेव न करें.
- साइबर कैफे में इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने से बचें.
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल(cybercrime.gov.in) या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत
साइबर अपराध के बदलते चेहरे को पहचानना और डिजिटल सतर्कता अपनाना अब समय की जरूरत है. हिमाचल जैसे अपेक्षाकृत शांत प्रदेश में भी, जिस तरह ये मामले सामने आ रहे हैं, उससे ये साफ हो जाता है कि डिजिटल दुनिया में भरोसे से ज्यादा जरूरी है सतर्कता.
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