देश का बहुचर्चित विवाह, क्यों नहीं हुआ इन पर हिंदू मैरिज एक्ट लागू, कैसे बनेंगे क़ानूनी कागज़?, जानिए
हिमाचल क्राइम न्यूज़
सिरमौर। डेस्क
आजकल पूरे भारत देश में सिरमौर के शिलाई इलाके में दो युवकों की एक लड़की शादी करने का मामला खासी सुर्खियां बटोर रहा है. दो भाइयों की एक ही युवती से शादी करने को लेकर जहां हाटी सुमदाय इसे परंपरा का हिस्सा बताते हुए समर्थन कर रहा है. वहीं, अब कई लोग इसकी निंदा भी कर रहे हैं. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्योंकि हिंदू मैरिज एक्ट में एक से अधिक शादी करना अपराध है तो क्या यह शादी भी गैरकानूनी है? ऐसे में हम इस सवाल का जबाव खोज लाए है.
हिंदू मैरिज एक्टः 2 भाइयों की एक दुल्हन से शादी वैध कैसे? जानिए
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में दो भाइयों ने एक युवती से शादी की.
दरअसल, भारत में आमतौर पर बहुपति प्रथा गैरकानूनी है. हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 5 कहती है कि यदि कोई व्यक्ति पहले से ही शादीशुदा हो तो वह दूसरी शादी नहीं कर सकता. उसे दूसरी शादी करने के लिए पहली पत्नी से कूनूनी तौर पर तलाक लेना होगा. भारत में हिंदी मैरिज एक्ट हिंदूओं के अलावा बौद्ध, जैन और सिख धर्म पर लागू होता है. हालंकि, हिंदू मैरिज एक्ट देश की अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होता है।
शिमला में हाईकोर्ट के वकील प्रशांत शर्मा कहते हैं कि संविधान की धारा 342 के तहत अनुसूचित जनजातियों को परंपराओं, रीति-रिवाजों, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रथाओं के मुताबिक, पहचान और संरक्षण दिया गया है और ऐसे में यह शादी कानूनी तौर पर गैरकानूनी नहीं कहलाई जाएगी. क्योंकि 2022 में केंद्र सरकार ने ‘हाटी’ समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया था. वह कहते हैं कि सिरमौर के अलावा, किन्नौर में भी सदियों से ऐसी परंपरा रही है. गौरतलब है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82 में बहुविवाह दंडनीय अपराध है. हालांकि, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने केंद्र के दर्जे को लागू नहीं किया है और यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा है. संविधान की धारा 342 के तहत अनुसूचित जनजातियों को परंपराओं, रीति-रिवाजों, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रथाओं के मुताबिक, पहचान और संरक्षण दिया गया है.
प्रदेश के पूर्व एडवोकेट जनरल विनय शर्मा ने शादी को लेकर फेसबुक पर पोस्ट किया तो उस पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वकील सकल भूषण ने लिखा कि “कानून की सीमाएं भी होती हैं…” उन्होंने कहा कि इस शादी को लेकर अब सवाल उठता है, लेकिन कानून की नजर में इसकी स्थिति क्या है? यह वास्तव में एक बहुत रोचक प्रश्न है. चूंकि दोनों विवाह एक साथ संपन्न हो रहे हैं, इसलिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 और 11 की सख्ती से व्याख्या की जाए तो शायद इन पर लागू नहीं होंगी.
इसी तरह भारतीय दंड संहिता की धारा 494 (अब धारा 82 बीएनएस) भी इन विवाहों पर लागू नहीं होगी, क्योंकि विवाह एक साथ हुए हैं. इसके अलावा, जब पति-पत्नी (दोनों पति और एक पत्नी) स्वेच्छा से इस रिश्ते में शामिल हैं, तो फिर शिकायत करेगा कौन? दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 198 (अब धारा 219 बीएनएस) के अनुसार इस प्रकार के मामलों में केवल पीड़ित पक्ष ही शिकायत कर सकता है, लेकिन यहां तो कोई पीड़ित है ही नहीं—सभी सहमति से शामिल हैं. इस तरह के मामले यह दर्शाते हैं कि कानून की भी अपनी सीमाएं होती हैं. हर सामाजिक व्यवहार को कानून के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता. समाज की कुछ परंपराएं और व्यवस्थाएं ऐसी भी होती हैं जिन्हें कानून पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर सकता. एक दूल्हा प्रदीप नेगी जल शक्ति विभाग में नौकरी करता है, जबकि दूसरा भाई कपिल नेगी विदेश में होटल चीफ शेफ है.
पावंटा साहिब के पत्रकार जयप्रकाश तोमर कहते हैं कि सिरमौर के गिरीपार इलाके में एक महिला की कई भाइयों से शादी की प्रथा काफी पुरानी है. यहां पर जो महिला एक से अधिक शख्स से शादी करती है, इसमें शादी केवल एक ही भाई के नाम पर रजिस्टर्ड होती है और बच्चों को भी एक ही पिता का नाम मिलता है. केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष रमेश सिंगटा कहते हैं कि पहले भी ऐसी शादियां हुई हैं. पहले शादी के रजिट्रेशन को लेकर ज्यादा पूछा नहीं जाता और ना ही ज्यादा कागज होते थे. वह कहते हैं कि यह मामला हाईलाइट हो गया, जबकि यह पुरानी पंरपरा है, जिस पर उन्हें गर्व है.
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