हिमाचल में 24 घंटे में 88.80 करोड़ का नुकसान, 14 दिन में 69 लोगों की मौत, 37 लापता
हिमाचल क्राइम न्यूज़
शिमला। आयुष चंदेल
हिमाचल में मानसून सीजन अपने शुरुआती दौर में ही लोगों को कभी न भूलने वाले जख्म दे गया है. प्रदेश में 20 जून को मानसून की एंट्री हुई थी. जिसके बाद प्रदेश में लगातार भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं. जिससे प्रदेश में हर रोज करोड़ों रुपयों में नुकसान का आंकड़ा बढ़ रहा है. प्रदेश में मानसून को प्रवेश हुए अभी 14 दिन ही हुए हैं. इस दौरान अभी तक देवभूमि में करोड़ों का नुकसान हो चुका है. प्रदेश में पेयजल योजनाएं प्रभावित होने से जल शक्ति विभाग को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है. वहीं, सरकार का फोकस अभी रेस्टोरेशन एफर्ट्स और रिलीफ मेजर्स पर है, ऐसे में ग्राउंड पर हुआ नुकसान राजस्व विभाग की रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े से कहीं अधिक हो सकता है.
24 घंटों में 88.80 करोड़ का नुकसान
हिमाचल में मानसून सीजन में ही रही भारी बारिश से होने वाला नुकसान हर रोज करोड़ों में जुड़ रहा है. राजस्व विभाग के डिजास्टर मैनेजमेंट सेल के मुताबिक प्रदेश में 3 जुलाई तक नुकसान का आंकड़ा 495.82 करोड़ तक पहुंच गया है. जो 2 जुलाई को 407.02 करोड़ था. ऐसे में 24 घंटों में प्रदेश को 88.80 करोड़ का और नुकसान झेलना पड़ा है. प्रदेश में जुलाई महीने में मानसून सीजन अपने पीक पर रहता है. मानसून सीजन में सबसे अधिक बारिश जुलाई में होती है. इस तरह से आने वाले दिनों में नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
14 दिनों में 69 मौतें
हिमाचल में मानसून ने एंट्री के साथ ही कहर बरपाना शुरू कर दिया है. प्रदेश में 20 जून को मानसून ने प्रवेश किया था. ऐसे में राजस्व विभाग के डिजास्टर मैनेजमेंट के आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल में मानसून सीजन के 14 दिनों में ही 69 लोगों की जान चली गई. इसमें बिलासपुर जिले में 6 लोगों की मौत हुई है. इसी तरह से चंबा में 7, हमीरपुर में 2, कांगड़ा में 13, किन्नौर में 3, कुल्लू में 4, लाहौल स्पीति में 1, मंडी में 20, शिमला में 5, सिरमौर में 1, सोलन में 2 व ऊना जिले में 5 लोगों की जान चली गई है. वहीं, इस दौरान भारी बारिश के कारण आई आपदा में 110 लोग जख्मी हुए हैं और 37 लोग लापता चल रहे हैं. जिनकी तलाश अभी जारी है. वहीं, भारी बारिश के कारण 250 पशुओं की भी मौत हुई है.
495.82 करोड़ का नुकसान
हिमाचल में 20 जून से 3 जुलाई तक बादल फटने की घटनाओं, बाढ़ आने और लैंडस्लाइड के कारण अब तक सरकारी और निजी संपत्ति को 495.82 करोड़ का नुकसान हो चुका है. इसमें जल शक्ति विभाग को सबसे अधिक 287.80 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है. प्रदेश भर में बहुत सी पेयजल योजनाएं पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गई हैं. वहीं, लैंडस्लाइड की वजह से पेयजल लाइनों टूट गई हैं. जिससे लोगों को भरी बरसात में अब पेयजल संकट की समस्या से जूझना पड़ रहा है. इसी तरह से मानसून ने PWD को भी गहरे जख्म दिए हैं. विभाग को 14 दिनों में 203.88 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा है. भारी बारिश से लैंडस्लाइड होने, डंगे गिरने और पानी के तेज बहाव के साथ मलबा आने से सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं. वहीं, प्रदेश में भारी बारिश से 10 पक्के घर व 8 कच्चे घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं. इसी तरह से प्रदेश में 15 पक्के घरों और 55 कच्चे घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा 21 दुकानें, 198 गौशालाएं ध्वस्त हो गई हैं.
"हिमाचल में 400 करोड़ से अधिक का नुकसान अभी तक रिपोर्ट हुआ है. जो हमारी वेबसाइट पर दर्ज है, लेकिन ग्राउंड पर जो नुकसान हुआ है, वह रिपोर्ट से ज्यादा है, क्योंकि सारा फोकस अभी डैमेज असेसमेंट के अलावा रेस्टोरेशन एफर्ट्स और रिलीफ मेजर्स पर है. लोग फ्लैश फ्लड और बादल फटने की वजह से प्रभावित हुए हैं. जब भी इस तरह की आपदा आती है तो बहुत ज्यादा मिट्टी और मलबा आता है. जिससे लोग मलबे के नीचे दबते हैं और पानी में बह जाते हैं. इस तरह के सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन मुश्किल होते हैं. पिछले सालों का भी यही अनुभव रहा है कि काफी प्रयासों के बाद भी मिसिंग लोगों को नहीं ढूंढ पाए हैं. हमारा पूरा प्रयास लापता हुए लोगों तलाशने का रहेगा." - डीसी राणा, निदेशक एवं विशेष सचिव राजस्व आपदा प्रबंधन एवं कार्मिक
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