टिका विक्रमादित्य सिंह बने राजा विक्रमादित्य सिंह, संभाली राजगद्दि
हिमाचल क्राइम न्यूज़
शिमला।
एक ओर अपने राजा के जाने का गम था, तो दूसरी और नए राज के राजतिलक की खुशी थी। हालांकि गम से आंखें नम थी, पर परंपरा का निर्वहन करना भी आवश्यक था। राज परिवार की प्रथा के अनुसार राजा का अंतिम संस्कार तब तक नहीं होता जब तक की नए राजा का राजतिलक नहीं होता। बुशहर रियासत की परंपरा के अनुसार पदम पैलेस में वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह का राजतिलक हुआ। मंत्रोच्चारण के बीच सारी परंपरा का निर्वहन किया गया, साथ ही मंत्रों द्वारा उन्हें शक्ति प्रदान की गई। चार ठहरी का बाज भी बजाया गया और जयकारा लगाया गया। वीरभद्र सिंह 13 साल की आयु में राजा बने थे।
उन्होंने 74 साल तक रियासत को संभाला। अब इनके बेटे विक्रमादित्य सिंह कृष्ण वंश के 123वें राजा बने हैं। रामपुर रियासत की यह प्रथा रही हैं कि राजा का अंतिम संस्कार तब तक नहीं होता, जब तक अगले उत्तराधिकारी का राजतिलक ना हो क्योंकि राजगद्दी को खाली नहीं छोड़ जा सकता। वीरभद्र सिंह के अंतिम संस्कार से पहले परंपराओं का निर्वहन करते हुए विक्रमादित्य सिंह राज महल में राज तिलक हुआ। उसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होगी।
चार ठहरी यानी शिंगला, शनेरी, लालसा और डंसा के वाद्य यंत्रों पहले विक्रमादित्य सिंह के राजतिलक के दौरान खुशी का एहसास कराने वाले धुनों से बजा रहे थे। इसके बाद शोक धुनों के साथ वाद्य यंत्र वीरभद्र सिंह की शव यात्रा में शरीक होंगे। रामपुर के जोगनी बाग स्थित राज परिवार के श्मशान घाट में वीरभद्र सिंह का अंतिम संस्कार होगा।






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