युग हत्याकांड : दोषियों को नहीं होगी फांसी, हाइकोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में बदला, जिंदा पत्थर से बांधकर मासूम को टैंक में फैंका था दोषियों ने
हिमाचल क्राइम न्यूज़
शिमला। क्राइम डेस्क / शिल्पी रैक्टा
शिमला के बहुचर्चित युग हत्याकांड के दोषियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है. यह निर्णय सजा-ए-मौत की सजा के पुष्टिकरण और दोषियों की अपील पर सुनाया गया. ऐसे में अब दो दोषियों को अंतिम सांस तक जेल में ही रहना होगा, वहीं, कोर्ट ने एक दोषी को बरी कर दिया है.
मामला सत्र न्यायाधीश शिमला की ओर से रेफरेंस के तौर पर हाई कोर्ट के समक्ष रखा गया था और दोषियों की ओर से दोष सिद्धि के खिलाफ अपील दायर की गई थी. अपील व रेफरेंस पर न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश राकेश कैंथला की विशेष खंडपीठ ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिस पर मंगलवार को फैसला सुनाया गया. गौरतलब है कि शिमला शहर में पेश आए इस हत्याकांड में दोषियों ने 4 साल के मासूम का शव पत्थर बांधकर पानी के टैंक में फेंक दिया था.
फैसले पर युग के परिजनों ने नाराजगी जताई है और सुप्रीम कोर्ट में न्याय के लिए गुहार लगाने की बात कही है. युग के पिता विनोद गुप्ता ने कहा कि 11 वर्ष के बीत जाने के बाद की युग को न्याय नहीं मिला है और अब हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है, जिससे वह खुश नहीं है. युग के दोषियों को फांसी दे देनी चाहिए थी लेकिन इतना वक्त बीत जाने पर भी दोषी जिंदा है. युग को न्याय दिलाने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाएंगे और तुरंत फांसी की सजा देने की न्यायालय में मांग करेंगे.
पिता विनोद कुमार ने कहा कि जिस आरोपी को छोड़ा गया, उसी के घर में युग को रखा गया था और उसी की गाड़ी से किडनैपिंग को अंजाम दिया गया था. उन्होंने कहा कि वे 11 साल से न्यायालय का दरवाजा खटखटा रहे हैं, लेकिन आज भी न्याय नहीं मिलाय उन्होंने भावुक होकर कहा कि अगर उनका बेटा जिंदा होता तो आज 15 साल का हो गया होता. अब युग के माता-पिता इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे. विनोद कुमार ने कहा कि अगर वहां से भी न्याय नहीं मिला, तो भगवान दोषियों को जरूर सजा देगा.
फिरौती के लिए किया था बच्चे का अपहरण
14 जून, 2014 को शिमला के राम बाजार में यह घटना पेश आई थी. तीन दोषियों ने फिरौती के लिए 4 साल के युग को किडनैप कर लिया था और फिर करीब 2 साल बाद अगस्त 2016 में शिमला के भराड़ी के पानी के टैंक में युग का कंकाल बरामद था. तीनों दोषियों ने मासूम को पत्थर बांध कर जिंदा पानी के टैंक में फेंक दिया था.व इस केस में कुल 105 गवाहों की गवानी हुई थी और कोर्ट ने सभी को फांसी की सजा सुनाई थी. 5 सितंबर 2018 को तीन दोषियों को सुनाई थी सजा-ए-मौत
कोर्ट ने दोषियों को 5 सितंबर 2018 को सजा-ए-मौत सुनाई थी. न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने इस केस को दुर्लभ में दुर्लभतम श्रेणी बताया था. कोर्ट ने पड़ोसी तेजिंद्र सिंह, चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी को फांसी की सजा सुनाई थी. तेंजिंद्र सिंह को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया.
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