हिमाचल आपदा राज्य घोषित, अब मोदी सरकार को रियायतों के साथ करनी ही पड़ेगी प्रदेश कि सहायता?
हिमाचल क्राइम न्यूज़
शिमला। एक्सपर्ट डेस्क
प्रदेश में भारी बारिश से लगातार तबाही हो रही है और ऐसे में सुक्खू सरकार ने प्रदेश का आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है. हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सुक्खू सरकार ने आपदा क्षेत्र घोषित करने और डिजास्टर एक्ट लागू करने करने के निर्देश जारी किए गए. ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस एक्ट का क्या मतलब होता है?
दरअसल, किसी भी राज्य को आपदा प्रभावित घोषित करने पर केंद्र सरकार वित्तीय मदद देती है. राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के अलावा अतिरिक्त पैकेज भी केंद्र से मिल सकता है और प्रभावित लोगों को तत्काल राहत सामग्री, मुआवज़ा, अस्थायी आश्रय और स्वास्थ्य सुविधाएँ दी जाती हैं. मकानों, सड़कों, पुलों, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की बहाली के लिए विशेष योजनाएँ चलाई जाती हैं. अहम बात है कि अफवाहें फैलाने पर सरकार आपदा प्रबंधन कानून के तहत लोगों पर केस दर्ज करवा सकती है.
कर और कर्ज़ में रियायतें
प्रभावित इलाकों में किसानों व छोटे व्यापारियों को कर्ज़ चुकाने में राहत मिल सकती है. कभी-कभी टैक्स या बिजली-पानी बिलों में छूट दी जाती है. एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें बड़े पैमाने पर तैनात की जाती हैं. सेना और अर्धसैनिक बलों को भी राहत व बचाव कार्य के लिए लगाया जा सकता है. केंद्र और राज्य मिलकर पुनर्निर्माण का “विशेष पैकेज” तैयार करते हैं. इसमें सड़कें, स्कूल, अस्पताल और कृषि भूमि बहाल करने के उपाय शामिल होते हैं. हालांकि, यह सब फायदे केंद्र सरकार की ओर से आपदा घोषित करने पर मिलते हैं.
क्या है यह अधिनियम? यह भारत में लागू एक कानून है, जिसे आपदाओं के समय कुशल प्रतिक्रिया और प्रबंधन के लिए बनाया गया है. इसमें प्राकृतिक (जैसे बाढ़, भूकंप) और मानव-जनित (जैसे बड़ी दुर्घटनाएँ) आपदाओं दोनों को शामिल किया गया है और हिमाचल प्रदेश बाढ़, लैंडस्लाइड या यूं कहें कि प्रकृति के प्रकोप से दहल उठा है. मॉनसून सीजन में प्रदेश में अब तक जान माल का भारी नुकसान हुआ है.
क्या-क्या आपदाएँ शामिल हैं? इस अधिनियम में निम्न प्रकार की “अधिसूचित आपदाएँ” शामिल हैं: चक्रवात, सूखा, भूकंप, आग, बाढ़, सुनामी, ओलावृष्टि, भूस्खलन, हिमस्खलन, बादल फटना, कीट हमले, पाला, ठंडी हवाएँ आदि.
केंद्र और राज्यों में कौन-कौन से निकाय होते हैं? एनडीएमए (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण): इसके अध्यक्ष हमेशा प्रधानमंत्री होते हैं, और यह नीति बनाता और समन्वय करता है.
एसडीएमए (राज्य स्तरीय): मुख्यमंत्री इसके प्रमुख होते हैं, जो नीति निर्माण और कार्यान्वयन की जिम्मेवारी संभालते हैं.डीएमए (जिला स्तरीय): यह जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन की योजना और कार्यान्वयन करता है.
वित्त और सहायता का प्रावधान? केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) से फंड मुहैया कराती है. राज्यों को सहायता देने के लिए “राज्य आपदा राहत कोष” (SDRF) होता है, जिसमें 75% फंड केंद्र से और 25% राज्य की ओर से दिया जाता है. हालांकि, अहम बात है कि अब तक केंद्र की तरफ से हिमाचल को आपदा प्रभावित घोषित नहीं किया गया है.
सरकार के निर्देशों का पालन न करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम (धारा-51 से 60 तक) के तहत कार्रवाई हो सकती है. साथ ही, आईपीसी की धारा-188 (सरकारी आदेश का उल्लंघन) के तहत भी मामला दर्ज होता है, जिसकी सजा 6 महीने तक जेल हो सकती है. इस एक्ट में धारा-51: सरकारी आदेश पालन न करने पर सजा होती है. धारा-56 में: सरकारी अधिकारी की ड्यूटी ना करने पर 1 साल तक सजा सजा हो सकती है.
क्या केंद्र अब हिमाचल को सहायत देगा?
हिमाचल प्रदेश को राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित घोषित किया है. हालांकि, केंद्र की तरफ से अब तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है और ऐसे में केंद्र सरकार सरकार हिमाचल की सुक्खू सरकार के आपदा प्रभावित घोषित करने पर सहायता के लिए बाध्य नहीं है और मोदी सरकार अपनी मर्जी से प्रदेश की मदद कर सकती है. गौरतलब है कि सोमवार तो आपदा प्रभावित राज्य घोषित करने तक हिमाचल में 320 लोगों की मौत हो चुकी है. 20 जून के बाद ये मौंते हुई हैं, जिनमें सड़क हादसे भी हैं. वहीं, 3 हजार करोड़ की संपति का नुकसान भी प्रदेश को हुआ है. प्रदेश में इस मॉनसून सीजन में 20 जून से अब तक 231 बार आपदाएं हैं. इसमें 95 बार भूस्खलन, 91 बार फ्लैश फ्लड और 45 बार बादल फटे हैं. सबसे अधिक घटनाएं लाहौल-स्पीति जिले में दर्ज हुई हैं.

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