न्यायमूर्ति बोबडे ने ली 47वें मुख्य न्यायाधीश की शपथ

 हिमाचल क्राइम न्यूज़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क।

न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे ने आज देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) पद की शपथ ली। उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई और हाल ही में अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ करने के फैसले में भी वह शामिल रहे हैं।

63 वर्षीय न्यायमूर्ति बोबडे ने गोगोई का स्थान लिया। माना जा रहा है कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति या उनके नाम को खारिज करने संबंधी कॉलेजियम के फैसलों का खुलासा करने के मामले में वह पारंपरिक दृष्टिकोण अपनाएंगे। नामित मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने एक साक्षात्कार में कहा कि लोगों की प्रतिष्ठा को केवल नागरिकों की जानने की इच्छा पूरी करने के लिए बलिदान नहीं किया जा सकता।

न्यायाधीशों के खाली पड़े पदों और न्यायिक आधारभूत संरचना की कमी के सवाल पर न्यायमूर्ति बोबडे ने अपने पूर्ववर्ती सीजेआई गोगोई की ओर से शुरू किए गए कार्यों को तार्किक मुकाम पर पहुंचाने की इच्छा जताई। न्यायमूर्ति गोगोई ने अदालतों में भर्तियों और आधारभूत संरचनाओं की कमी पर संज्ञान लिया और सभी राज्यों तथा संबंधित उच्च न्यायालयों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश देने के साथ खुद निगरानी भी की थी।
अगस्त 2017 में तत्कालीन सीजेआई जेएस खेहर की अध्यक्षता में नौ न्यायाधीशों की पीठ ने एकमत से, निजता के अधिकार को भारत में संवैधानिक रूप से संरक्षित मूल अधिकार होने का फैसला दिया था। इस पीठ में भी न्यायमूर्ति बोबडे शामिल थे। न्यायमूर्ति बोबडे 2015 में उस तीन सदस्यीय पीठ में शामिल थे जिसने स्पष्ट किया कि भारत के किसी भी नागरिक को आधार संख्या के अभाव में मूल सेवाओं और सरकारी सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाल ही में न्यायमूर्ति बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने बीसीसीआई का प्रशासन देखने के लिए पूर्व नियंत्रक एवं महालेखाकार विनोद राय की अध्यक्षता में बनाई गई प्रशासकों की समिति को निर्देश दिया कि वे निर्वाचित सदस्यों के लिए कार्यभार छोड़े। 
17 महीने का कार्यकाल
न्यायमूर्ति बोबडे 17 महीने तक उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद पर रहेंगे और 23 अप्रैल 2021 को सेवानिवृत्त होंगे। न्यायमूर्ति बोबडे महाराष्ट्र के वकील परिवार से आते हैं और उनके पिता अरविंद श्रीनिवास बोबडे भी मशहूर वकील थे।
नागपुर में जन्म
* 24 अप्रैल 1956 में महाराष्ट्र के नागपुर में न्यायमूर्ति बोबडे का जन्म
* नागपुर विश्वविद्यालय से कला एवं कानून में स्नातक की उपाधि हासिल की
* 1978 में महाराष्ट्र बार परिषद में उन्होंने बतौर अधिवक्ता अपना पंजीकरण कराया
* 21 साल तक नागपुर पीठ में 21 साल तक सेवाएं दी
* 1998 में न्यायमूर्ति बोबडे वरिष्ठ अधिवक्ता बने
2012 में मुख्य न्यायाधीश बने
न्यायमूर्ति बोबडे ने 29 मार्च 2000 में बंबई उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। 16 अक्तूबर 2012 को वह मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। 2013 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बने।
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