दुःखद : हमीरपुर के एक निजी हस्पताल कि लापरवाही से गई गर्भवती महिला कि जान
हिमाचल क्राइम न्यूज़
हमीरपुर। संवाद सूत्र
जिला हमीरपुर क्षेत्र के साथ लगते एक निजी अस्पताल से टांडा रेफर की गई एक आठ माह की गर्भवती की मौत हो गई है। मृतक महिला के परिजनों ने निजी अस्पताल पर उपचार में लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। मिली जानकारी के मुताबिक इस संबंध में मृतक के परिजन सोमवार को उपायुक्त और सीएमओ को ज्ञापन सौंपेंगे।
मृतक के ससुर हेमराज चौहान और चाचा ससुर पुरुषोत्तम ने बताया कि उनकी बहू शुरू से ही इस निजी अस्पताल से अपना उपचार और जांच करवा रही थी। शनिवार को जब उसे कुछ दिक्कत हुई तो वह इसी अस्पताल में दिखाने आई। यहां के चिकित्सकों ने उसे पहले बड़सर के एक अस्पताल में जांच के लिए भेजा और बाद में दवाई देकर घर भेज दिया, लेकिन इतने में गर्भवती की तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। जब गर्भवती को दोबारा उसी निजी अस्पताल लाया गया तो यहां पर उसे एक इंजेक्शन लगाया गया। जब गर्भवती की तबीयत और बिगड़ गई तो चिकित्सकों ने उसे टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। जब वह टांडा अस्पताल पहुंचे तो उसके करीब दो घंटे बाद शनिवार रात करीब डेढ़ बजे उनकी बहू की मौत हो गई। टांडा में चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि गर्भवती के पेट का बच्चा पहले ही मृत हो चुका था, जिस पर परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर पहले ही निजी अस्पताल से उसे रेफर कर दिया जाता तो शायद बहू की जान बच सकती थी।
निजी अस्पताल की इस लापरवाही से परिजनों व गांव में लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। लोगों ने अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। मृतक रेखा देवी का पति नरेश कुमार निजी नौकरी करता है। नरेश के पिता हेमराज चौहान ने बताया कि निजी अस्पताल ने आखिरी मौके पर उन्हें टांडा जाने के लिए कहा। अगर पहले ही रेफर कर देते तो शायद जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि वह प्रशासन से इस सारे प्रकरण की शीघ्र ही लिखित शिकायत कर जांच की मांग करेंगे। रविवार को मृतक का अंतिम संस्कार किया गया है। जिसमें ग्राम पंचायत बारी के प्रधान रविंद्र ठाकुर, उप प्रधान सुमेश कुमार सहित ग्रामीण मौजूद रहे।
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