शिमला:शादियों में सिर्फ 50 मेहमानों कि इजाज़त, कर्फ्यू अब रात्रि 9 बजे से
हिमाचल क्राइम न्यूज़ ब्यूरो
शिमला।
कोरोना महामारी पर नियंत्रण करने के लिए 23 नवंबर को कैबिनेट बैठक में लिए निर्णय एक हफ्ते के भीतर ही सरकार ने फिर बदल दिए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि नए फैसलों के तहत अब सभी सरकारी कर्मचारी 1 दिसंबर से 31 दिसंबर तक पांच दिन कार्यालय में और छठे दिन वर्क फ्रॉम होम करेंगे। इसके अलावा शिमला, मंडी, कुल्लू और कांगड़ा में रात्रि 9 बजे से सुबह 6 बजे तक रात्रि कर्फ्यू लगेगा, जो पहले रात्रि 8 से सुबह 6 बजे तक था। वहीं प्रदेश में समय-समय पर कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा करेंगे।
सीएम ने शनिवार को शिमला में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सभी उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, सीएमओ और मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सा अधीक्षकों को बैठक में उक्त निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि सामाजिक समारोहों विवाह आदि में लोगों की लापरवाही से कोरोना के मामले बढ़े हैं। इसलिए ऐसे समारोहों में अब लोगों की संख्या 200 या 100 नहीं, बल्कि 50 रहेगी।
सभी राजनीतिक समारोह वर्चुअली होंगे, जिनमें उपस्थिति नियमानुसार होगी। सीएम ने कहा कि कोरोना मरीजों के अधिक मामलों वाले स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। स्वास्थ्य संस्थानों में शीघ्र परीक्षण और कोरोना मरीजों की ट्रेसिंग सुविधा के लिए पैरा मेडिकल स्टाफ उपलब्ध करवाएंगे। उन्होंने कोरोना के बढ़ते मामलों और मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को संबंधित जिलों के कोविड सेंटरों में बिस्तर संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। इस दौरान स्वास्थ्य सचिव ने भी कई सुझाव दिए। वहीं, मुख्य सचिव अनिल खाची ने कहा कि कोरोना मरीजों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
हिमाचल में जल्दी होगा प्री फैब्रिकेटिड केंद्रों का निर्माण
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि राज्य में प्री-फैब्रिकेटिड कोविड केंद्रों का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाएगा। केंद्र सरकार ने राज्य को सात ऑक्सीजन प्लांट स्वीकृत किए हैं। उन्होंने उपायुक्तों को इन्हें स्थापित करने के लिए जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। मरीजों के बेहतर इलाज के लिए कोविड वार्ड के प्रभारी के रूप में एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त करके अस्पतालों में फुलप्रूफ व्यवस्था करने का भी निर्णय लिया है।
सीएम ने उपायुक्तों को कोविड रोगियों के परीक्षण और उपचार के लिए निजी अस्पतालों और प्रयोगशालाओं को भी शामिल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि होम आइसोलेशन के तहत रह रहे एसिंप्टोमेटिक रोगियों के उपचार के लिए उचित प्रोटोकॉल अपनाया जाना चाहिए। इन रोगियों के लिए पल्स ऑक्सीमीटर की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध की जाए, जिससे खून में ऑक्सीजन की मात्रा की नियमित निगरानी हो सके। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ चिकित्सक वार्ड के कम से कम तीन राउंड सुनिश्चित करें।
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