कब है नवरात्र के अष्टमी व नौवमी का सही दिन, यहाँ जानिए
है कन्या पूजन की सही तिथि:
नवरात्रि पूजा के तहत शनिवार यानी 24 अक्टूबर 2020 को अष्टमी और नवमी संयुक्त रूप से पड़ रही है. ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि नवमी को ही सिद्धिदात्री की पूजा होगी. इसके अलावा अष्टमी तिथि को कन्या पूजन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. अत: अगर आप कन्या पूजन करना चाहते हैं तो आज से सही मुहूर्त शुरू हो रहा है.
नवरात्रि में अष्टमी तिथि को महागौरी के इस मंत्र की आराधना करें:
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नवरात्रि 2020: अष्टमी पर जरूर करें दुर्गा सप्तशती का पाठ
आज नवरात्रि पूजन के तहत मां के आठवें स्वरूप यानी महागौरी की पूजा की जा रही है. नवरात्रि की अष्टमी तिथि आज है. हिंदू मान्यताओं में मां दुर्गा के नौ स्वरूप को ही शक्ति के तौर पर देखा गया है और उन्हीं की आराधना होती है. आपको बता दें कि दुर्गाष्टमी के दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष फलदायी होता है.
महानवमी रविवार को
महानवमी 25 अक्टूबर 2020 दिन रविवार को मनाई जाएगी.
माता के आगमन और प्रस्थान की सवारी
देवी भागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा का आगमन भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में भी देखा जाता है. हर वर्ष नवरात्रि में देवी दुर्गा का आगमन अलग-अलग वाहनों में सवार होकर आती हैं और उसका अलग-अलग महत्व होता है. शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनायी जाती है.
हर कन्या का अलग रुप
नवरात्रि में सभी उम्र वर्ग की कन्याएं मां दुर्गा के विभिन्न रुपों का प्रतिनिधित्व करती हैं.10 वर्ष की कन्या सुभद्रा, 9 वर्ष की कन्या दुर्गा, 8 वर्ष की शाम्भवी, 7 वर्ष की चंडिका, 6 वर्ष की कालिका, 5 वर्ष की रोहिणी, 4 वर्ष की कल्याणी, 3 वर्ष की त्रिमूर्ति और 2 वर्ष की कन्या को कुंआरी माना जाता है.
कन्या पूजा का नियम
कन्या पूजा में आपको 02 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को शामिल करना चाहिए. जब आप कन्या पूजा करने जाएं तो 02 से 10 वर्ष तक की 9 कन्याओं को भोज के लिए आमंत्रित करें तथा उनके साथ एक छोटा बालक भी होना चाहिए. 9 कन्याएं 9 देवियों का स्वरुप मानी जाती हैं और छोटा बालक बटुक भैरव का स्वरुप होते हैं. कन्याओं को घर आमंत्रित करके उनके पैर पानी से धोते हैं, फिर उनको चंदन लगाते हैं, फूल, अक्षत् अर्पित करने के बाद भोजन परोसते हैं. फिर उनके चरण स्पर्श करके आशीष लेते हैं और उनको दक्षिणा स्वरुप कुछ उपहार भी देते हैं.
दशहरा या विजयादशमी
शारदीय नवरात्रि की दशमी तिथि का प्रारंभ 25 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 41 मिनट से हो रहा है, जो 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजे तक है. ऐसे में विजयादशमी या दशहरा का पर्व 25 अक्टूबर दिन रविवार को मनाया जाएगा.
दुर्गा मूर्ति विसर्जन
मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन सोमवार को 26 अक्टूबर को होगा। उस दिन आपको सुबह 06:29 बजे से सुबह 08:43 बजे के मध्य दुर्गा विसर्जन कर देना चाहिए।
शारदीय नवरात्रि की महानवमी तिथि
इस वर्ष महानवमी तिथि का प्रारंभ 24 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 58 से हो रहा है, जो अगले दिन 25 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 41 मिनट तक है. ऐसे में आपको महानवमी का व्रत 24 अक्टूबर को रखना है.महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि
इस वर्ष अष्टमी तिथि का प्रारंभ 23 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 57 मिनट पर हो रहा है, जो अगले दिन 24 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 58 मिनट तक है. ऐसे में इस वर्ष महाअष्टमी का व्रत 23 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन महागौरी की पूजा की जाती है.
जानिए कब है दशहरा
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल दशहरा या विजयादशमी का त्योहार 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा. दशहरा हर साल दीपावली से ठीक 20 दिन पहले मनाया जाता है. हालांकि इस साल नवरात्रि 9 दिन के न होकर 8 दिन में ही समाप्त हो रहे हैं. दरअसल, इस साल अष्टमी और नवमी का एक ही दिन पड़ रही है. 24 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक ही अष्टमी है, उसके बाद नवमी लग जाएगी. जिसके चलते दशहरा 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा.
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था. भगवान राम के रावण पर विजय प्राप्त करने के कारण ही इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है
महाष्टमी की निशापूजा
महाष्टमी की निशापूजा: 23 अक्टूबर 2020 दिन शुक्रवार
महाष्टमी का व्रत: 24 अक्टूबर 2020 दिन शनिवार,
अष्टमी-नवमी की संधि पूजा 24 अक्टूबर को दिन 11:03 से 11:51 बजे तक
नवरात्रि व्रत कन्या पूजन: 25 अक्टूबर 2020 दिन रविवार को ही दिन में 11:14 बजे तक
मां दुर्गा मूर्ति विसर्जन
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, मां दुर्गा की मूर्ति का विर्सजन 26 अक्टूबर को होगा. 26 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 29 मिनट से सुबह 8 बजकर 43 मिनट के बीच मूर्ति विसर्जन करना शुभ माना जा रहा है.
शारदीय नवरात्रि 2020 की अष्टमी तिथि
इस साल अष्टमी तिथि 23 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 57 मिनट से शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी 24 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक रहेगी. ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के अनुसार, जो लोग पहला और आखिरी नवरात्रि व्रत रखते हैं, उन्हें अष्टमी व्रत 24 अक्टूबर को रखना चाहिए. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 24 अक्टूबर को अष्टमी व्रत रखना उत्तम है. अष्टमी को मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है.
कन्या भोज
यूं तो नवरात्रि के किसी भी दिन कन्या भोज करना शुभ माना जाता है. हालांकि अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या भोज कराना बेहद उत्तम माना गया है.
शारदीय नवरात्रि 2020 की महानवमी
इस साल महानवमी 24 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर, अगले दिन 25 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. ज्योतिर्विद के अनुसार, नवरात्र व्रत का पारण 25 अक्टूबर को ही यज्ञ-हवन आदि से निवृत होकर किया जा सकता है. महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.
जाने नवरात्रि व्रत के बारे में
महाष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर 2020 दिन शनिवार को रखा जाएगा. इसके अलावा महानवमी 25 अक्टूबर 2020 दिन रविवार को मनाई जाएगी. इसी दिन नवमी रविवार को ही दिन में 11:14 बजे तक नवरात्रि व्रत अनुष्ठान से सम्बंधित यज्ञ- हवन, कन्या पूजन, कर लिया जाएगा. जो लोग पहला और आखिर का व्रत रखते हैं वो 24 अक्टूबर को ही अष्टमी का व्रत रखेंगे और 25 अक्टूबर को नवमी के दिन कन्या पूजन करेंगे. 25 अक्टूबर को ही शाम को दशहरा का त्योहार मनाया जाएगा. नवरात्र व्रत का पारण 25 अक्टूबर को ही यज्ञ-हवन आदि से निवृत होकर किया जा सकता है.
महा अष्टमी कब है (NAVRATRI 2020 ASHTAMI PUJA)
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, अष्टमी और नवमी एक ही दिन होने के बावजूद भी देवी मां की अराधना के लिए भक्तों को पूरे नौ दिन मिलेंगे. इस साल अष्टमी तिथि का प्रारंभ 23 अक्टूबर (शुक्रवार) को सुबह 06 बजकर 57 मिनट से हो रहा है, जो कि अगले दिन 24 अक्टूबर (शनिवार) को सुबह 06 बजकर 58 मिनट तक रहेगी. ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के अनुसार, जो लोग पहला और आखिरी नवरात्रि व्रत रखते हैं, उन्हें अष्टमी व्रत 24 अक्टूबर को रखना चाहिए. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 24 अक्टूबर को अष्टमी व्रत रखना उत्तम है. इस दिन महागौरी की पूजा का विधान है.
दशहरा कब है (DUSSEHRA 2020)
दशमी तिथि 25 अक्टूबर से शुरू होकर 26 अक्टूबर की सुबह 9 बजे तक रहेगी. ऐसे में इस साल दशहरा का त्योहार 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा.
महानवमी कब है (NAVRATRI 2020 NAVAMI PUJA)
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल महानवमी तिथि का प्रारंभ 24 अक्टूबर (शनिवार) की सुबह 06 बजकर 58 मिनट से हो रहा है. जो कि अगले दिन 25 अक्टूबर (रविवार) को सुबह 07 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. नवरात्रि व्रत पारण 25 अक्टूबर को किया जाएगा. नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है.
महाष्टमी शनिवार को
महाष्टमी शनिवार को है. इसी दिन नवमी की पूजा भी होगी. कोरोना काल में यथासंभव हम पूजा में संयम बरतें, हर अहं भाव त्याग कर पूरी श्रद्धा के साथ मां महिषासुर मर्दिनी का वंदन करें कि महामारी के संकट से उबरने की मां हमें शक्ति प्रदान करें.
साधना-उपासना का महापर्व है महाष्टमी
वैसे तो पूरा शारदीय नवरात्र भक्तों के लिए मां की साधना कर उनकी असीम अनुकंपा पाने का अवसर होता है, मगर इसमें भी महाष्टमी की तिथि सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह दिन करूणामयी मां महागौरी को प्रसन्न करने का होता है, जो सहज अपने आशीर्वाद से सबकी झोली भर देती हैं.
नवरात्र पूजा के लिए हवन सामग्री
कूष्माण्ड (पेठा), 15 पान का पत्ता, 15 सुपारी, 15 जोड़े लौंग, 15 छोटी इलायची, 15 कमल गट्ठे, 2 जायफल, 2 मैनफल, पीली सरसों, पंच मेवा, सिन्दूर, उड़द मोटा, 50 ग्राम शहद, 5 ऋतु फल, केले, 1 नारियल, 2 गोला, 10 ग्राम गूगल, लाल कपड़ा, चुन्नी, गिलोय, 5 सराईं, आम के पत्ते, सरसों का तेल, कपूर, पंचरंग, केसर, लाल चंदन, सफेद चंदन, सितावर, कत्था, भोजपत्र, काली मिर्च, मिश्री, अनारदाना.
सवा पांच सेर सामग्री का प्रमाण
1.5 किलो चावल, एक किलो घी, 1.5 किलो, 2 किलो तिल, बूरा तथा सामग्री श्रद्धा के अनुसार. अगर, तगर, नागर मोथा, बालछड़, छाड़छबीला, कपूर कचरी, भोजपत्र, इन्द जौ, सितावर, सफेद चन्दन प्रत्येक एक रुपये का लेकर सामग्री में मिलावें. आम या ढाक की सूखी लकड़ी 20 किलो. नवग्रह की नौ समिधा (आक, ढाक, कत्था, चिरचिटा, पीपल, गूलर, जांड, दूब, कुशा).
हवन साम्रगी
आम की लकड़ी, तना और पत्ता, पीपल का तना और छाल, बेल, चंदन की लकड़ी, अश्वगंधा, नीम, पलाश, गूलर की छाल, ब्राह्मी, मुलैठी की जड़, कर्पूर, तिल, चावल, लौंग, गाय का घी, गुग्गल, लोभान, इलायची, शक्कर और जौ। इसके अलावा एक सूखा नारियल या गोला, कलावा या लाल रंग का कपड़ा और एक हवन कुंड.
हवन विधि
कल अष्टमी है. अष्टमी और नवमी की पूजा के पश्चात आप हवन कुंड को एक साफ स्थान पर स्थापित कर दें. हवन सामग्री को एक बड़े पात्र में मिलाकर रख लें. इसके बाद आम की लकड़ी और कर्पूर हवन कुंड में रखें और आग प्रज्ज्वलित कर दें. इसके पश्चात इन मंत्रों से हवन प्रारंभ करें.
ओम आग्नेय नम: स्वाहा
ओम गणेशाय नम: स्वाहा
ओम गौरियाय नम: स्वाहा
ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा
ओम दुर्गाय नम: स्वाहा
ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा
ओम हनुमते नम: स्वाहा
ओम भैरवाय नम: स्वाहा
ओम कुल देवताय नम: स्वाहा
ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा
ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा
ओम विष्णुवे नम: स्वाहा
ओम शिवाय नम: स्वाहा
ओम जयंती मंगलाकाली, भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा
आज माता को पुष्प, गुड़ और नैवेद्य चढ़ाएं
मां का सातवां स्वरूप कालरात्रि साधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. शास्त्रों के अनुसार देवी कालरात्रि का भय उत्पन्न करने वाला स्वरूप पापियों का नाश करने के लिए है. मां कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल देती हैं. इस दिन मां कालरात्रि का स्मरण कर मां को पुष्प, गुड़ और नैवेद्य चढ़ाएं. मान्यता है कि इस दिन गुड़ का भोग लगाने से मां प्रसन्न होती हैं और सभी विपदाओं का नाश करती हैं. भोग के साथ मां के कालरात्रि मंत्रों का जाप करें. कुंडलिनी जागरण के लिए जो साधक साधना में लगे होते हैं, वे महासप्तमी के दिन सहस्त्रसार चक्र का भेदन करते हैं. देवी की पूजा के बाद शिव व ब्रह्मा की पूजा भी जरूर करनी चाहिए.
आराधना का महापर्व हैं दुर्गाष्टमी
कल नवरात्रि की अष्टमी तिथि है. इस दिन भक्त दुर्गा माता के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करते है. दुर्गाष्टमी देवी दुर्गा की उपासना करने के सर्वश्रेष्ठ दिनों में से एक माना जाता है. इसलिए देवी दुर्गा के सभी भक्तों को इस दिन मां दुर्गा की उपासना करनी चाहिए.
यहां जानिए पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट
लाल चुनरी, आम के पत्ते, लाल वस्त्र, मौली, श्रृंगार का सामान, दीपक, घी/ तेल, लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती, धूप, अगरबत्ती, माचिस, चौकी, चौकी के लिए लाल कपड़ा, नारियल, दुर्गा सप्तशती किताब, कलश, साफ चावल, कुमकुम, फूल, फूलों का हार, चालीसा व आरती की किताब, देवी की प्रतिमा या फोटो, पान, सुपारी, लाल झंडा, लौंग, इलायची, बताशे या मिसरी, कपूर, उपले, फल-मिठाई, कलावा, मेवे की खरीदारी जरूर कर लें.
देवी वन्दना मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।
कल है अष्टमी-नवमी तिथि
आज दोपहर के बाद अष्टमी हो जाएगी. कल अष्टमी और नवमी दोनों तिथि लेगेगी. इन नौ दिनों के दौरान भक्त मां को प्रसन्न करने और उनकी कृपा दृष्टि पाने के लिए व्रत करते हैं. नवरात्रि के नौ दिन तक व्रत किया जाता है. अष्टमी तिथि को हवन होता है और नवमी वाले दिन कंजक पूजन के साथ नवरात्रि का समापन हो जाता है, जिसके बाद नवरात्रि के व्रत का पारण किया जाता है.
कन्या पूजन विधि
यज्ञ करने के बाद व्रतियों को कन्या रूपी देवी को भोजन कराने की मान्यता है. इसके बाद उसे उपहार देना चाहिए. कंजक पूजन के बाद देवी भगवती का अपने परिवार के साथ ध्यान करें. मां भगवती से सुख-समृद्धि की कामना करें. इसके बाद ‘या देवी सर्वभूतेषु शांति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:’ मंत्र का ग्यारह बार जाप करें.
मां कालरात्रि की पूजा विधि
इस दिन सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं. फिर मां का स्मरण करें और मां कालरात्रि को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य श्रद्धापूर्वक अर्पित करें. फिर मां को उनका प्रिय पुष्प रातरानी चढ़ाएं. फिर मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें. इसके बात सच्चे मन से मां की आरती करें. मान्यता है कि इस दिन मां को गुड़ जरूर अर्पित करना चाहिए. साथ ही ब्राह्माणों को दान भी अवश्य करना चाहिए. मां का प्रिय रंग लाल है.
जानें आज का शुभ मुहूर्त 23 अक्टूबर दिन शुक्रवार
शुद्ध आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी दिन- 12:09 उपरांत अष्टमी
श्री शुभ संवत -2077, शाके-1942, हिजरी सन 1441- 42
सूर्योदय-06:22
सूर्यास्त -05:38
सूर्योदय कालीन नक्षत्र- पूर्वाषाढ़ा उपरांत उत्तराषाढ़ा, सुकर्मा -योग, व -करण
सूर्योदय कालीन ग्रह विचार- सूर्य -तुला, चंद्रमा- धनु, मंगल- मीन, बुध- तुला, गुरु- धन, शुक्र -कन्या, शनि- धनु, राहु, वृष, केतु- वृश्चिक
चौघड़िया
प्रात: 06:00 से 07:30 तक चर
प्रातः 07:30 से 09:00 तक लाभ
प्रातः 09:00 से 10:30 बजे तक अमृत
प्रातः10:30 बजे से 12:00 बजे तक काल
दोपहरः 12:00 से 01:30 बजे तक शुभ
दोपहरः 01:30 से 03:00 बजे तक रोग
दोपहरः 03:00 से 04:30 बजे तक उद्वेग
शामः 04:30 से 06:00 तक चर
मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
पंचांग के अनुसार 23 अक्टूबर को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है. सप्तमी की तिथि में मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. मां कालरात्रि की पूजा से अज्ञात भय, शत्रु भय और मानसिक तनाव नष्ट होता है. मां कालरात्रि की पूजा नकारात्मक ऊर्जा को भी नष्ट करती है. मां कालरात्रि को बेहद शक्तिशाली देवी का दर्जा प्राप्त है.
जाने कब है नवमी तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल महानवमी तिथि की शुरुआत 24 अक्टूबर दिन शनिवार की सुबह 06 बजकर 58 मिनट से हो रहा है, जो कि अगले दिन 25 अक्टूबर दिन रविवार की सुबह 07 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. नवरात्रि व्रत पारण 25 अक्टूबर को किया जाएगा. नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है.
कन्या पूजन की सही विधि
नवरात्रि में कन्या पूजा का विशेष महत्व है. सप्तमी, अष्टमी और महा नवमी के दिन कन्या पूजन करने का विशेष महत्व है. कन्या पूजन के लिए सबसे पहले कन्याओं का पैर धुलें. फिर उन्हें एक साफ आसन पर बैठायें. उनके हाथों में मौली बांधे और माथे पर रोली का टीका लगाएं. दुर्गा मां को उबले हुए चने, हलवा, पूरी, खीर, पूआ व फल का भोग लगाया जाता है. यही प्रसाद कन्याओं को भी भोजन स्वरूप खिलाया जाता है.
कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा भी दी जाती है. इसी के साथ कन्याओं को लाल चुन्री और चूड़ियां भी चढ़ाएं. इस तरह विधि विधान कन्याओं का पूजन करने के बाद उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. कई जगह कन्याओं को भोजन कराने वाले लोग आशीर्वाद स्वरूप उनकी थपकी लेते हैं. इस बात का भी ध्यान रखें कि कन्याओं के साथ एक लांगूर भी होना चाहिए. माना जाता है कि लांगूर यानी छोटे लड़के के बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती.
जानें क्या है सही तिथि
ऋषिकेश पंचांग के अनुसार 22 अक्टूबर दिन गुरुवार की दोपहर 1 बजकर 17 मिनट के बाद सप्तमी तिथि की शुरुआत हो गई है. सप्तमी तिथि 23 अक्टूबर शुक्रवार को दिन 12 बजकर 09 मिनट तक रहेगी. इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी और 24 अक्टूबर शनिवार को दिन में 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी. इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो रही है जो 25 अक्टूबर रविवार को दिन में 11 बजकर 14 तक रहेगी, इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो रही है, जो दूसरे दिन 26 अक्टूबर सोमवार को दिन में 11 बजकर 33 मिनट तक रहेगी. अतः 25 अक्टूबर को ही विजयदशमी पर्व का उत्सव मनाया जाएगा.
कन्या पूजन
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन या कुमारी पूजा 24 अक्टूबर को करना है. हालांकि महाष्टमी और महानवमी दोनों ही तिथियों को कन्या पूजन किया जाता है.
दशहरा या विजयादशमी
शारदीय नवरात्रि की दशमी तिथि का प्रारंभ 25 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 41 मिनट से हो रहा है, जो 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजे तक है. ऐसे में विजयादशमी या दशहरा का पर्व 25 अक्टूबर दिन रविवार को मनाया जाएगा.
मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन सोमवार को 26 अक्टूबर को होगा. उस दिन आपको सुबह 06:29 बजे से सुबह 08 बजकर 43 बजे के मध्य दुर्गा विसर्जन कर देना चाहिए.
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