जान जोखिम में डालकर नाला पार करने को लोग मजबूर, प्रशासन से कोई सहायता नही


हिमाचल क्राइम न्यूज़ || ब्यूरो चम्बा ||   विकास खंड मैहला की ग्राम पंचायत प्रीणा के 14 गांवों के लोगों को हर दिन अपने कार्यों के लिए गांव से बाहर जाने के लिए जान हथेली पर लेकर गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हालांकि इन लोगों को यह बात भलीभांति पता है कि अगर अंडोरा नाला पर ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर पर बनाई गई अस्थायी पुल से गुजरते समय जरा सी चूक हो जाए तो जान जा सकती है लेकिन दूसरा कोई विकल्प नहीं होने के चलते लोगों को न चाहते हुए भी मौत की इस पुली को पार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

किसी भी सरकार व प्रशासन ने नहीं सुनी मांग
हैरानी की बात है कि लंबे समय से प्रीणा पंचायत के लोग इस नाले पर स्थायी पुल के निर्माण करने की मांग करते चले आ रहे हैं लेकिन अभी तक किसी भी सरकार व प्रशासन ने इस मांग के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई है। यही वजह है कि अब तक इस मौत की पुली को पार करते समय कई ग्रामीण गिर कर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं दर्जनों मवेशियों की गिरकर मौत हो चुकी है। हंडोरा नामक खड्ड पर ग्रामीणों द्वारा बनाई गई यह अस्थायी पुली हर वर्ष बारिश के दिनों में बह जाती है। इस वजह से प्रीणा पंचायत के गांव हंडोरा, रैणा, डिभरी, दूनिल, गाण, बनेई, सतेई, ढांगू, सकरेणा-1, सकरेणा-2, छतकड़, दिघोड़, राय व अलैणी कई दिनों तक शेष विश्व के साथ पूरी तरह से कट जाते हैं।


बरसात के दिनों में अस्पताल नहीं पहुंच पाता मरीज
File Photo

 बरसात में तो यह स्थिति पैदा हो जाती है कि नाले के उफान पर होने के चलते अगर कोई व्यक्ति गांव में बीमार पड़ जाए तो उसे उपचार के लिए अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में उक्त रोगी को उसकी किस्मत पर छोडऩे के लिए ग्रामीण मजबूर होते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हर दिन उपरोक्त गांवों के बच्चों को आठवीं से आगे की शिक्षा प्राप्त करने के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल लिल्ह जाना पड़ता है और इसके लिए उन्हें इस मौत की पुली से होकर गुजरना पड़ता है।


कैसे विकास की मुख्यधारा के साथ जुड़ सकते हैं गांव
ग्रामीणों ने कहा कि भरमौर विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाली इस पंचायत के इन गांववासियों को आज तक एक स्थायी पुली तक नसीब नहीं हुई है। ऐसे में यह गांव कैसे विकास की मुख्यधारा के साथ जुड़ सकते हैं। लोगों ने भरमौर विधायक व जिला प्रशासन से इस विषय पर गंभीरता दिखाने की मांग की है।


प्रशासन को 3-4 बार सौंपा मांग पत्र
ग्राम पंचायत प्रीणा की प्रधान बीना देवी ने कहा कि प्रीणा के 14 गांवों के लोगों को हर दिन नाले पर बनी अस्थायी पैदल पुली को पार करने के लिए जान हथेली पर लेकर गुजरना पड़ता है। इस नाले पर पुली निर्माण के लिए जिला प्रशासन को करीब 3-4 बार मांग पत्र सौंपा गया लेकिन प्रशासन ने इस कार्य के लिए कोई धन मुहैया नहीं करवाया है। चंद दिनों के बाद बरसात शुरू होने वाली है। इस मौसम में इस गांववासियों को फिर से कई दिनों तक अपने गांवों तक ही सीमित होकर रहना पड़ेगा क्योंकि नाले का जलस्तर बढऩे से ग्रामीणों द्वारा बनाई गई अस्थायी पुल बह जाएगी।


Editing:-Vishal Kumar
©®:PK


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